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Friday, 19 August 2016

मिस्ड कॉल

आज फिर देखो वो ही हुआ
कि फोन आया तुम्हारा
और ग्यारह को पूरे सात कम थे
वही गाना सुना होगा तुमने लाइन के उस पार से
जिस पर कई बार ठुमके लगाए थे हमने
मोगरे की खुश्बू भी फिर... याद ही होगी, क्यूँ?

आज फिर लगा होगा तुम्हें
कि मैं जानबूझ के अवाय्ड करती हूँ
मिस्ड कॉल अलर्ट नंबर 1 हो चुका था
पूरी हेल्लोटयून के बाद
ऑटो-रिकॉर्ड मेसेज भी याद कर लिया होगा तुमने अब तो
बंगाली में दोहराना तो ज़रा
मुद्दा हो गया तुम्हारी एक्सेंटेड हिन्दी सुने हुए

दिल्ली के एक बड़े अस्पताल आई थी, एक हाथ में काग़ज़ों का झोला था
दूसरे हाथ में कुछ पर्चे,
फोन और उसके उपर एक गिलास चाय थी
कटिंग, मसाला मार के

जब दोबारा कॉल किया तुमने तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी
बाजू बैठी एक हरियाणवी मौसी से दोस्ती हो गयी थी मेरी
"कैसे तुम सबसे यूँ ही बातें कर लेती हो"
होते अगर आस पास, तो यही पूछ लेते तुम
फिर से, मुझसे
और मैं फिर से कहती, जैसे तुमसे की थी

हैद्राबाद से चूड़ी लेते वक़्त
सांताक्रूज़ में पावभाजी खाते हुए
अब ज़्यादा ना याद आओ
वरना सब जान लेंगे कि तुम कौन हो
फिर ढूँढा करेंगे मेरे एल्ब्म्स के पन्नो में
मेरे खुलते, बन्धते बालों में
जहाँ तुम... अब हो ही नही

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